झारखंड में हिरासत में मौत के 262 मामलों की न्यायिक जांच होगी। ये वही मामले हैं, जिनकी जांच न्यायिक दंडाधिकारी से नहीं कराकर कार्यपालक दंडाधिकारी से कराई गई थी।
इस मामले को झारखंड उच्च न्यायालय ने कुछ दिन पहले गंभीरता से लेते हुए इसे नियम विरुद्ध बताया और न्यायिक जांच कराने का आदेश दिया था।
झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के बाद से ही राज्य सरकार रेस है। ये सभी मामले वर्ष 2018 से 2025 के बीच के हैं। एक बार फिर इन कांडों से जुड़ी सभी फाइलें खुलेंगी।
संबंधित जिलों के जिला एवं सत्र न्यायाधीश के माध्यम से नामित न्यायिक मजिस्ट्रेट पूरे मामले की जांच करेंगे। छह महीने के भीतर ऐसे सभी मामलों की जांच पूरी कर ली जानी है।
हिरासत में मौत मामले में सुनवाई के क्रम में झारखंड हाई कोर्ट को राज्य सरकार ने बताया था कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच राज्य में हिरासत में मौत के कुल 482 मामले सामने आए हैं। इनमें 437 मौतें न्यायिक हिरासत में हुईं थीं, जबकि 45 मौतें पुलिस हिरासत में हुईं।
हिरासत में मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा निर्देश के आलोक में कार्रवाई होती है। इसकी तत्काल सूचना आयोग को दी जाती है और संबंधित जिले के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को भी इसकी जानकारी देने का प्रविधान है।
कुल 482 मामलों में से 220 मामलों में न्यायिक दंडाधिकारी से जांच तो कराई गई, लेकिन 262 मामले ऐसे रह गए, जिनमें पुलिस ने न्यायिक दंडाधिकारी से जांच न कराकर कार्यपालक दंडाधिकारी से जांच करवा दी, जो नहीं होना चाहिए था। कोर्ट ने इसे नियम विरुद्ध बताया है।
कुछ पिटाई से तो कई हिरासत में फांसी लगा लिए थे
सुनवाई के क्रम में यह स्पष्ट हुआ है कि न्यायिक व पुलिस हिरासत में मौत के मामले में मूल रूप से तीन ही कारण स्पष्ट हुए हैं। किसी की पुलिस की पिटाई से मौत हुई तो किसी ने हिरासत में ही फांसी लगा ली। कई जेल में बीमार पड़े और उससे उनकी मौत हो गई।
थाने की हाजत में या पुलिस हिरासत में मौत के मामले गंभीर श्रेणी के बताए गए हैं। आरोपित के फर्जी फिटनेस प्रमाण पत्र के आधार पुलिस पूछताछ की अनुमति ले लेती है और कई बार किसी आरोपित की पूछताछ के क्रम में मौत हो जाती है।
पूर्व में रांची जिले में बुंडू के युवक रूपेश स्वांसी की मौत भी पुलिस हिरासत में हुई थी, जांच में उसके साथ मारपीट की पुष्टि हुई थी।
पलामू में भी पुलिस पर आरोपित से मारपीट के आरोपों की पुष्टि हो चुकी है, जिसमें आरोपित की मौत हो गई थी। कई संदिग्धों ने थाना हाजत में ही फांसी लगा ली थी। अब न्यायिक जांच में कई मामले स्पष्ट होंगे।
