नई दिल्ली | Supreme Court of India ने मोटर वाहन बीमा (Motor Insurance) से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि हर मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी में वाहन में बैठे सभी यात्रियों को स्वतः बीमा सुरक्षा नहीं मिलती। यह इस बात पर निर्भर करता है कि वाहन मालिक ने किस प्रकार की बीमा पॉलिसी ली है।
अदालत ने कहा कि मोटर बीमा मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है:
- थर्ड पार्टी (Third Party) इंश्योरेंस: यह कानूनन अनिवार्य है और दुर्घटना में तीसरे पक्ष (Third Party) को हुए नुकसान की भरपाई करता है।
- कॉम्प्रिहेंसिव (Comprehensive) पॉलिसी: इसमें वाहन के नुकसान के साथ-साथ अतिरिक्त कवरेज भी शामिल हो सकता है, लेकिन इसकी शर्तें पॉलिसी के अनुसार अलग-अलग होती हैं।
- पैकेज/एड-ऑन (Package/Add-on) पॉलिसी: इसमें अतिरिक्त प्रीमियम देकर वाहन में बैठे यात्रियों (Occupants), ड्राइवर या अन्य जोखिमों का भी बीमा कराया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि वाहन में बैठे यात्रियों के लिए अलग से कवरेज नहीं लिया गया है, तो केवल सामान्य थर्ड पार्टी या बेसिक पॉलिसी के आधार पर बीमा कंपनी पर मुआवजा देने की बाध्यता नहीं होगी।
अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी दुर्घटना के दावे का निर्णय संबंधित बीमा पॉलिसी की शर्तों और उसमें उपलब्ध कवरेज के आधार पर किया जाएगा।
क्या है इस फैसले का महत्व?
- वाहन मालिकों को अपनी बीमा पॉलिसी की शर्तें ध्यान से पढ़नी चाहिए।
- यदि परिवार या अन्य लोग नियमित रूप से वाहन में सफर करते हैं, तो Occupant Cover या उपयुक्त Add-on Cover लेना बेहतर रहेगा।
- दुर्घटना की स्थिति में मुआवजा इस बात पर निर्भर करेगा कि पॉलिसी में संबंधित जोखिम शामिल है या नहीं।
यह फैसला मोटर बीमा से जुड़े विवादों में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है और वाहन मालिकों को अपनी बीमा पॉलिसी का सही चयन करने की सलाह देता है।
