छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वैवाहिक मामलों में दो अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं। कोर्ट ने साफ किया है कि कोई भी व्यक्ति अपने गलत आचरण का फायदा नहीं उठा सकता है और कानून का दुरुपयोग स्वीकार नहीं किया जाएगा। बिलासपुर स्थित हाई कोर्ट ने एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि बिना तलाक दूसरी शादी करना पत्नी के प्रति मानसिक क्रूरता है। ऐसे में पति तलाक की मांग नहीं कर सकता है। कोर्ट ने पति की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने पत्नी पर परित्याग (डेज़र्शन) का आरोप लगाया था। हाई कोर्ट ने साफ कहा कि जो व्यक्ति खुद कानून का उल्लंघन करता है, वह अपने गलत आचरण के आधार पर राहत नहीं मांग सकता है। इस मामले में रायपुर फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए पति की अपील खारिज कर दी गई।
बिना ठोस कारण अलग रहने पर नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता
दूसरे मामले में हाई कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर पत्नी बिना किसी ठोस और वाजिब कारण के पति से अलग रहती है, तो उसे गुजारा भत्ता (मेंटेनेंस) का अधिकार नहीं है। यह फैसला चीफ जस्टिस की सिंगल बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए पत्नी की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी।
क्या है पूरा मामला?
मामले के अनुसार, अंबिकापुर निवासी महिला का विवाह साल 2019 में जमशेदपुर के युवक से हुआ था। शादी के बाद दोनों के बीच विवाद हुआ और पत्नी अलग रहने लगी। महिला ने गुजारा भत्ता की मांग की, लेकिन कोर्ट ने पाया कि अलग रहने का कोई ठोस कारण साबित नहीं किया गया। हाई कोर्ट ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 144 के तहत भी राहत पाने के लिए वाजिब और ठोस कारण होना जरूरी है। केवल आरोपों के आधार पर गुजारा भत्ता या अन्य राहत नहीं दी जा सकती है।
इन दोनों फैसलों के जरिए हाई कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि शादीशुदा जीवन में कानून का पालन जरूरी है और बिना तलाक दूसरी शादी गंभीर अपराध और मानसिक क्रूरता है। इसके अलावा बिना कारण अलग रहने पर गुजारा भत्ता का दावा नहीं किया जा सकता है। फिलहाल, यह फैसले भविष्य में वैवाहिक मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल माने जा रहे हैं।

