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व्यापारी ने ED पर लगाया प्रताड़ित करने का आरोप, हाई कोर्ट ने कहा- कानून के दायरे में हो पूछताछ

रायपुर के व्यवसायी हेमंत चंद्राकर द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर लगाए गए शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों पर दायर याचिका का निपटारा करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि आगे की पूछताछ कानून के मुताबिक होगी और ईडी कोई जबरदस्ती या थर्ड डिग्री का इस्तेमाल नहीं करेगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि…

व्यापारी ने ED पर लगाया प्रताड़ित करने का आरोप, हाई कोर्ट ने कहा- कानून के दायरे में हो पूछताछ

रायपुर के व्यवसायी हेमंत चंद्राकर द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर लगाए गए शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों पर दायर याचिका का निपटारा करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि आगे की पूछताछ कानून के मुताबिक होगी और ईडी कोई जबरदस्ती या थर्ड डिग्री का इस्तेमाल नहीं करेगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर याचिकाकर्ता को किसी अधिकारी के आचरण पर आपत्ति है तो वह आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) या 200 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत कर सकता है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति विभु दत्त गुरु की खंडपीठ ने कहा कि चूंकि ईडी की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि आगे किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या अवैधानिक तरीके का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, इसलिए इस याचिका में अब किसी आदेश की आवश्यकता नहीं है।

बता दें कि रायपुर के रहने वाले हेमंत चंद्राकर सृष्टि आर्गेनिक्स नामक खाद-कीटनाशक निर्माण इकाई के मालिक हैं। उनका कहना है कि वे वर्ष 2008 से कारोबार कर रहे हैं और विभिन्न सरकारी विभागों को खाद व कीटनाशक की आपूर्ति करते आए हैं। 3 सितंबर 2025 को ईडी ने उनके घर पर छापा मारा।

चंद्राकर का कहना है कि उस दौरान न तो कोई आपत्तिजनक वस्तु मिली और न ही किसी तरह की अनियमितता। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी अधिकारियों ने उनसे सीसीटीवी कैमरे बंद करवाए, परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और उन्हें यह कबूलने के लिए दबाव डाला कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके सहयोगियों को कमीशन देकर ठेके लिए हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि उनसे कुछ दस्तावेजों पर बिना पढ़े हस्ताक्षर करवाए गए और बार-बार धमकाया गया कि यदि वे अधिकारियों की बात नहीं मानेंगे तो पूरे परिवार को झूठे केस में फंसा दिया जाएगा।

कथित मारपीट का आरोप
याचिकाकर्ता ने बताया कि 10 सितंबर को वे समन पर ईडी दफ्तर पहुंचे, जहां रात में पूछताछ चली। बाद में 29 सितंबर को फिर बुलाया गया, जहां कथित रूप से उन्हें लोहे की राड जैसी वस्तु से मारा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान ईडी के डिप्टी डायरेक्टर नीरज कुमार सिंह ने उन्हें धमकाया कि यदि वे मनमाफिक बयान नहीं देंगे तो उनकी बेटी को कभी उनका चेहरा देखने नहीं दिया जाएगा।

इस कथित घटना के बाद उन्होंने थाने में शिकायत दी और मेडिकल जांच की मांग की, परंतु पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। निजी अस्पतालों ने भी हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और स्वतंत्र न्यायिक जांच, एफआइआर दर्ज करने तथा सुरक्षा प्रदान करने की मांग की।

ईडी और केंद्र ने रखा अपना पक्ष
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसिटर जनरल एसवी राजू और ईडी की ओर से डा. सौरभ कुमार पांडे व जोहेब हुसैन ने अदालत को बताया कि हेमंत चंद्राकर से पूछताछ सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में की जा रही है और किसी तरह की जबरदस्ती या मारपीट नहीं हुई। ईडी अधिकारियों ने अदालत को आश्वस्त किया कि भविष्य में भी पूछताछ कानून के अनुरूप ही की जाएगी और कोई दुराचार नहीं होगा।

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