पीएम केयर्स फंड जन स्वास्थ्य आपात स्थिति को देखते बना, इसपर आपत्ति नहीं की जा सकती: सुको

पीएम केयर्स फंड की राशि को एनडीआरएफ में स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह कहकर खारिज कर दिया कि पीएम केयर्स फंड का सृजन कोविड-19 जैसी जनस्वास्थ्य से संबंधित आपात स्थिति में सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया है और जरूरत की इस घड़ी में इसके गठन को लेकर…

पीएम केयर्स फंड जन स्वास्थ्य आपात स्थिति को देखते बना, इसपर आपत्ति नहीं की जा सकती: सुको

पीएम केयर्स फंड की राशि को एनडीआरएफ में स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह कहकर खारिज कर दिया कि पीएम केयर्स फंड का सृजन कोविड-19 जैसी जनस्वास्थ्य से संबंधित आपात स्थिति में सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया है और जरूरत की इस घड़ी में इसके गठन को लेकर किसी प्रकार की आपत्ति नहीं की जा सकती। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह राष्ट्रीय कोष है, जिसका उद्देश्य कोविड-19 महामारी द्वारा पेश किसी भी आपात स्थिति या आपदा की स्थिति से निपटना और प्रभावित लोगों को राहत मुहैया कराना है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह तय करना केन्द्र सरकार का काम है कि किस कोष से कौन से वित्तीय उपाय किये जायें 

सेन्टर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस की जनहित याचिका पर सुको ने 75 पेज में दिया फैसला 

कोई भी जनहित याचिकाकर्ता न तो यह दावा कर सकता है कि अमुक वित्तीय मदद एक विशेष कोष से दी जाये और न ही यह न्यायालय वित्तीय निर्णयों के फैसले देख सकती है। शीर्ष अदालत ने गैर सरकारी संगठन सेन्टर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस की जनहित याचिका पर अपने 75 पेज के फैसले में ये टिप्पणियां कीं। इस याचिका में कोविड-19 महामारी के लिये पीएम केयर्स फंड में मिली राशि एनडीआरएफ में हस्तांतरित करने का निर्देश देने का अनुरोध न्यायालय से किया गया था।

केन्द्र ने न्यायालय को सूचित किया था कि प्रधानमंत्री इस पीएम केयर्स फंड के पदेन अध्यक्ष हैं जबकि देश के रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री इसके पदेन न्यासी है। केन्द्र ने 

कहा था –

न्यास बोर्ड के अध्यक्ष (प्रधानमंत्री) को न्यास बोर्ड में तीन न्यासियों को मनोनीत करने का अधिकार होगा जिनका योगदान अनुसंधान, स्वास्थ्य, विज्ञान, सामाजिक कार्य, कानून, सार्वजनिक प्रशासन और परोपकार के क्षेत्र में होगा। न्यासी के रूप में नियुक्त कोई भी व्यक्ति जनसेवक के रूप में काम करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीएम केयर्स फंड सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास है और यह सरकारी कोष नहीं है। पीठ ने कहा कि इस कोष में व्यक्तियों और संगठनों का स्वैच्छिक योगदान है और इसे किसी प्रकार का बजटीय समर्थन प्राप्त नहीं है। और न्यास का प्रशासन न्यासियों में निहित होने का तथ्य इसके सार्वजनिक स्वरूप को खत्म नहीं करता है। 

न्यायालय ने इस तथ्य का भी उल्लेख किया कि इस न्यास के उद्देश्यों को पूरा करने के लिये पीएम केयर्स फंड में व्यक्तियों और संस्थानों द्वारा किये गये योगदान से जनहित के लिये धन दिया जायेगा।

 पंजीकरण कानून 1908 के तहत पंजीकृत

,पीएम केयर्स फंड धर्मार्थ न्यास हैं

 न्यायालय ने कहा कि यह एक धर्मार्थ न्यास है, जिसका 27 मार्च, 2020 को नयी दिल्ली में पंजीकरण कानून, 1908 के तहत पंजीकरण हुआ है। इस न्यास को किसी प्रकार का बजटीय समर्थन या सरकार से धन नहीं मिलता है। न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता पीएम केयर्स फंड का सृजन करने के न्यासियों के विवेक पर सवाल नहीं उठा सकते, जिसका गठन कोविड-19 महामारी से उत्पन्न जन स्वास्थ्य आपात स्थिति में सहायता प्रदान करने के लिये किया गया है। 

अदालत ने कहा कि एनडीआरएफ और पीएम केयर्स फंड के स्वरूप एकदम भिन्न 

याचिकाकर्ता संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा था कि वह इस कोष के सृजन को लेकर सदाशयता पर किसी प्रकार का संदेह नहीं कर रहे हैं लेकिन पीएम केयर्स फंड का सृजन आपदा प्रबंधन कानून के प्रावधानों के खिलाफ है। उनका तर्क था कि आपदाओं से निपटने के लिये जब पहले से ही एनडीआरएफ कोष है तो ऐसी स्थिति में पीएम केयर्स फंड नहीं बनाया जाना चाहिए था। दवे का कहना था कि राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा ऑडिट किया जाता है, लेकिन सरकार ने बताया है कि पीएम केयर्स फंड का निजी ऑडिटर्स से ऑडिट कराया जायेगा। हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि एनडीआरएफ और पीएम केयर्स फंड के स्वरूप एकदम भिन्न हैं।

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