यह न्याय के हित में नहीं होगा; हाईकोर्ट ने रद्द की दहेज मामले में दर्ज FIR

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महिला द्वारा अपने ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज कराई दहेज उत्पीड़न व क्रूरता की FIR को रद्द कर दिया है। करीब 9 साल पुराने इस मामले में महिला ने शादी के 40 दिन के अंदर उसके पति द्वारा आत्महत्या करने के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले की सुनवाई के…

यह न्याय के हित में नहीं होगा; हाईकोर्ट ने रद्द की दहेज मामले में दर्ज FIR

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महिला द्वारा अपने ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज कराई दहेज उत्पीड़न व क्रूरता की FIR को रद्द कर दिया है। करीब 9 साल पुराने इस मामले में महिला ने शादी के 40 दिन के अंदर उसके पति द्वारा आत्महत्या करने के बाद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने इस केस को अस्पष्ट आरोपों व कानून के दुरुपयोग का मामला बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि इस केस में आपराधिक कार्यवाही को जारी रखना न्याय के हित में नहीं होगा।

अदालत ने यह फैसला महिला की ननद और सास व ससुर की उस याचिका पर सुनाया, जिसमें उन्होंने महिला की शिकायत पर अपने खिलाफ साल 2016 में दहेज उत्पीड़न व अन्य आरोपों में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस दंपति की शादी मार्च 2016 में हुई थी। ससुराल वालों ने दावा किया कि इसके तुरंत बाद दंपति के बीच कुछ मतभेद पैदा हो गए। पति उदास निराश रहने लगा। यह भी कहा गया कि महिला के परिवार ने न केवल पति पर दबाव डाला, बल्कि उसे हर हाल में उसके साथ रहने की धमकी भी दी।

युवक के परिजनों के अनुसार महिला के माता-पिता ने उन्हें काफी डरा दिया था। उनके पूरे परिवार को दहेज और घरेलू हिंसा के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी थी। यह भी कहा गया कि पत्नी व उसके माता-पिता द्वारा किए गए अनुचित कृत्यों, लगातार धमकियों की वजह से मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित होकर पति ने 13 अप्रैल, 2016 को शादी के लगभग 40 दिन के अंदर आत्महत्या कर ली थी।

याचिका के मुताबिक पति की मौत के बाद महिला ससुराल छोड़कर मायके में चली गई थी। वहीं जब पुलिस ने आत्महत्या के मामले की जांच शुरू की तो महिला ने दो महीने के बाद अपने सास-ससुर व ननद के खिलाफ दिल्ली पुलिस की महिला क्राइम ब्रांच में दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज करा दिया। जिसके बाद पीड़ितों ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपने खिलाफ दर्ज इस FIR को दर्ज कराने के लिए याचिका लगाई थी।

याचिका को स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण मामला था जहां विवाह 40 दिन भी नहीं टिक पाया। पति ने आत्महत्या कर ली, जिसके परिणामस्वरूप संबंधों में खटास आ गई। उसके बाद तकलीफ को बढ़ाने वाली मुकदमेबाजी शुरू हो गई। पीठ ने कहा कि आरोप बेबुनियाद पाए गए हैं और आरोपों को लेकर कोई सबूत पेश नहीं किए गए। ऐसे में उच्च न्यायालय ने ससुराल पक्ष के लोगों के खिलाफ दर्ज मामले को रद्द कर दिया।

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