बिहार में हो रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं महुआ, EC के फैसले को दी चुनौती

07 Jul 2025 बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का मामला लगातार गर्माता जा रहा है। चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ अब तृणमूल कांग्रेस की नेता और सांसद महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। महुआ मोइत्रा ने भारत निर्वाचन आयोग के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी…

बिहार में हो रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं महुआ, EC के फैसले को दी चुनौती

07 Jul 2025

बिहार वोटर लिस्ट विवाद: महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, चुनाव  आयोग पर क्या-क्या उठाए सवाल
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का मामला लगातार गर्माता जा रहा है। चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ अब तृणमूल कांग्रेस की नेता और सांसद महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। महुआ मोइत्रा ने भारत निर्वाचन आयोग के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में कहा कि वह निर्वाचन आयोग के 24 जून के उस आदेश को रद्द करने का अनुरोध करती हैं, जिसके तहत संविधान के विभिन्न प्रावधानों का कथित उल्लंघन करते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया जा रहा है।

याचिका के मुताबिक, संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत जनहित में दायर वर्तमान रिट याचिका में भारत निर्वाचन आयोग के 24 जून को जारी आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया है। आदेश के तहत बिहार में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण किया जा रहा है, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(ए), 21, 325, 328 व जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।विज्ञापन

महुआ ने अपनी याचिका में कहा, अगर इस आदेश को रद्द नहीं किया गया, तो यह देश में बड़े पैमाने पर पात्र मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर सकता है, जिससे लोकतंत्र, स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कमजोर हो सकते हैं। महुआ ने शीर्ष अदालत से भारत निर्वाचन आयोग को देश के अन्य राज्यों में मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण के इस तरह के आदेश जारी करने से रोकने का निर्देश देने का अनुरोध किया।

अधिवक्ता नेहा राठी के माध्यम से दायर की गई इस याचिका में कहा गया, देश में यह पहली बार है कि ईसीआई द्वारा इस तरह का अभ्यास किया जा रहा है, जहां उन मतदाताओं से अपनी पात्रता साबित करने के लिए कहा जा रहा है, जिनके नाम पहले से ही मतदाता सूची में हैं या पहले भी कई बार मतदान कर चुके हैं। यह आवश्यकता अनुच्छेद 326 के विपरीत है और संविधान के आरपी अधिनियम 1950 द्वारा परिकल्पित नहीं की गई बाहरी योग्यताएं पेश करती है।

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