सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा से जुड़े मामलों में अहम निर्देश देते हुए कहा है कि ट्रायल कोर्ट को दोषसिद्धि के तुरंत बाद और सजा तय करने से पहले आरोपी के पक्ष और खिलाफ मौजूद परिस्थितियों पर रिपोर्ट मंगाना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसा न करने से संतुलित और न्यायसंगत सजा प्रक्रिया प्रभावित होती है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने पटना हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा के अमल पर रोक लगा दी है।
अदालत ने कहा कि कई मामलों में ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट आरोपी की पृष्ठभूमि, मानसिक स्थिति और सुधार की संभावना जैसे पहलुओं पर रिपोर्ट नहीं मंगाते, जिससे जरूरी जानकारी पहली बार सुप्रीम कोर्ट के सामने आती है और प्रक्रिया में देरी होती है।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगर ट्रायल कोर्ट रिपोर्ट नहीं मंगाए तो हाई कोर्ट इसे अनिवार्य रूप से मंगाए। साथ ही, दोषी को प्रभावी कानूनी सहायता देने के लिए विशेष कानूनी टीम उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण को भी दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा है, ताकि सजा तय करते समय सामाजिक, आर्थिक और मानसिक परिस्थितियों का सही मूल्यांकन हो सके।कोर्ट ने क्या अहम बात कही?
अदालत ने निर्देश दिया है कि वह ऐसे दिशा-निर्देश तैयार करे, जिनसे सजा तय करते समय आरोपी की सामाजिक, आर्थिक और मानसिक परिस्थितियों का समुचित आकलन किया जा सके। इस फैसले को न्याय प्रणाली में मानवीय दृष्टिकोण को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में मौत की सजा से जुड़े मामलों में अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करेगा।

