सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने के लिए राज्यों द्वारा फंड के इस्तेमाल के पहलू पर विचार-विमर्श करने के लिए छह मई को एक बैठक बुलाई जाए।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने अमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ देव से कहा कि केंद्र सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बैठक करें।
पीठ ने कहा- ‘हम चाहते हैं कि अमिकस द्वारा आयोजित की जाने वाली बैठक में केंद्रीय गृह सचिव या उनके नामित व्यक्ति और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के गृह सचिव भाग लेंगे।’ यह मुद्दा तब सामने आया जब देव ने राज्यों द्वारा फंड के उपयोग का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्र 100 प्रतिशत फंड देता है, जबकि पहाड़ी राज्यों में 90 प्रतिशत और अन्य राज्यों में 60 प्रतिशत फंड केंद्र द्वारा दिया जाता है। पीठ ने कहा- ”राज्यों से फंड के उपयोग पर प्रतिक्रिया क्यों नहीं मिल रही है?’
शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया कि अमिकस इस मुद्दे पर केंद्र, राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के साथ बैठक बुला सकता है। मामले की अगली सुनवाई 13 मई को होगी और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
सात अप्रैल को केंद्र ने बताया था कि पुलिस थानों में सीसीटीवी स्थापित करने से संबंधित सभी मुद्दे दो सप्ताह में सुलझा लिए जाएंगे। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने के लिए पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था।
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