राजधानी के जिला अदालतों में काम करने वाले 30 साल के एक न्यायिक अधिकारी शनिवार को अपने सफदरजंग एन्क्लेव स्थित घर में मृत पाए गए। इस खबर से दिल्ली के वकीलों और न्यायिक अधिकारियों के बीच गहरा दुख और चिंता फैल गई है। साथ ही, यह सवाल भी उठने लगे हैं कि न्यायिक काम में मानसिक दबाव कितना ज्यादा होता है।
अमन शर्मा को जून 2021 में दिल्ली न्यायिक सेवा में नियुक्त किया गया था। उन्होंने सिम्बायोसिस लॉ स्कूल, पुणे से पढ़ाई की थी। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने मजिस्ट्रेट और सिविल जज के रूप में काम किया और आपराधिक व दीवानी मामलों की सुनवाई की।
अक्टूबर 2025 से वे कड़कड़डूमा कोर्ट में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (उत्तर-पूर्व जिला) के सचिव के रूप में भी काम कर रहे थे। इस जिम्मेदारी के साथ उन्हें अपने नियमित न्यायिक काम के अलावा अतिरिक्त प्रशासनिक काम भी संभालना पड़ता था।
अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस और संबंधित अधिकारी जांच कर रहे हैं, और उनकी मृत्यु के कारणों के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया गया है।
हालांकि, उनके ऊपर एक साथ कई जिम्मेदारियाँ होने की बात अब चर्चा में है। उनके साथ काम करने वाले लोग यह सोच रहे हैं कि क्या कम अनुभव वाले न्यायिक अधिकारियों पर शुरुआत में ही ज्यादा काम का दबाव डाला जाता है।

