डिजिटल अरेस्ट पर लगेगी लगामएजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही सरकार

सरकार डिजिटल गिरफ्तारी और साइबर धोखाधड़ी पर अंकुश के लिए सभी एजेंसियों के साथ मिल कर काम कर रही है।

 

आने वाले दिनों में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं जैसे कि साइबर धोखाधड़ी के संदिग्ध खातों में रकम ट्रांसफर पर अस्थाई रोक (टम्परेरी डेबिट होल्ड), सिम वैरीफिकेशन में कड़ाई, वाट्सअप का सिम बाइंडिंग तंत्र लागू करना, लंबी स्कैम कॉल को चिन्हित करना और उस पर रोक लगाना जैसी लंबी स्कैम कॉल डिजिटल अरेस्ट के मामलों में होती हैं।

 

इसके अलावा वाट्सअप ने जनवरी से लेकर मार्च तक 12 सप्ताह में डिजिटल गिरफ्तारी और साइबर धोखाधड़ी में शामिल 9,400 एकाउंट्स पर प्रतिबंध लगाया है। ये सारी जानकारी केंद्र सरकार ने डिजिटल गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल स्थिति रिपोर्ट में दी है।

 

डिजिटल गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। कोर्ट ने सरकार से सभी एजेंसियों के साथ मिल कर डिजिटल गिरफ्तारी और साइबर धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के उपाय करने को कहा था और कई निर्देश दिये थे। सुप्रीम कोर्ट के गत 9 फरवरी के आदेश के अनुपालन में अटॉर्नी जनरल ने केंद्र सरकार की यह स्थिति रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की है।

 

स्टेटस रिपोर्ट इंडियन साइबर क्राइम (आइफोरसी) और गृह मंत्रालय की ओर से दाखिल की गई है। रिपोर्ट में सरकार ने बताया है कि डिजिटल गिरफ्तारी, साइबर धोखाधड़ी के खतरे से निबटने के लिए टेलीकॉम रेगुलेटर, सार्विस प्रोवाइडर, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ), टेक दिग्गज और सीबीआई को शामिल करते हुए बहुआयामी प्रयास और कार्रवाई की जा रही है।

 

रिपोर्ट में इस मुद्दे पर विभिन्न एजेंसियों और हितधारकों के साथ की गई बैठक का ब्योरा दिया गया है और बताया गया है कि डिजिटल गिरफ्तारी और साइबर ठगी को रोकने के लिए क्या क्या उपाय किये जा रहे हैं।

 

सरकार ने बताया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा दूरसंचार विभाग द्वारा जताई गई चिंताओं पर वाट्सअप ने साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत ब्योरा दिया जिसमें वाट्सअप ने बताया कि उसने इस वर्ष जनवरी से व्यवस्थित ढंग से विशेष जांच शुरू की। ये जांच विशेष रूप से भारतीयों को निशाना बनाने वाले डिजिटल गिरफ्तारी और साइबर ठगी पर केंद्रित थी।

 

इस जांच में एक कठोर कार्यप्रणाली का पालन किया गया जिसमें शुरुआती संकेतों की पहचान करना, नेटवर्क की मैपिंग करना, पूरे नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करना और बड़े पैमाने पर स्वचलित सुरक्षा तंत्र विकसित करना शामिल था।

 

रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजिटल गिरफ्तारी में कथित तौर पर शामिल होने के कारण वॉट्सअप ने 9400 खातों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा उपयोगकर्ता की सुरक्षा बढ़ाने के लिए वॉट्सअप और भी कई उपाय लागू कर रहा है, जिसमें लोगों की पहचान शामिल है।

 

इसके तहत डिस्प्ले पिक्चर में आधिकारिक पुलिस या सरकारी प्रतीक चिन्हों का उपयोग करने वाले खातों की पहचान करके उन्हें हटाया जाएगा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वॉट्सअप एक नया फीचर लाने पर विचार कर रहा है जिसमें उपयोगकर्ताओं को नये बनाए गए या अस्थाई खातों से काल आने पर चेतावनी देगा।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि दूरसंचार विभाग और टेलीकाम सर्विस प्रोवाइडर ने फर्जी सिम कार्डों को निष्कृय करने के लिए एक नयी सख्त समयसीमा तय की है। इसमें संदिग्ध सिम कार्डों की पहचान के दो-तीन घंटों के भीतर उन्हें ब्लाक करने का तंत्र विकसित करने पर काम चल रहा है। यह भी बताया गया है कि सीबीआई ने डिजिटल गिरफ्तारी की जांच अपने हाथ में लेने के लिए 10 करोड़ रुपये के नुकसान की समयसीमा तय की है।

 

सीबीआईने अभी तक तीन बड़े मामले फिर से दर्ज किये हैं जिनमें बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हुई थी। डिजिटल अरेस्ट और साइबर धोखाधड़ी के शिकार लोगों को हुए नुकसान का मुआवजा दिये जाने की नीति पर विचार चल रहा है। वाट्सअप ने सिम बाइडिंग तंत्र लागू करने पर काम चलने की बात कही है।

 

सिम बाइडिंग एक सुरक्षा नियम है। इसके तहत, किसी ऐप के काम करने के लिए जरूरी है कि केवाइसी सत्यापित सिम कार्ड फोन में मौजूद हो, और चालू हालत में हो। अगर सिम कार्ड को फोन से निकाल दिया जाता है या बदल दिया जाता है, या वह बंद हो जाता है, तो वह ऐप काम करना बंद कर देगा।

 

रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई ने मनी म्यूल यानी अवैध लेनदेन से जुड़ी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए संदिग्ध लेन देने पर अस्थाई रोक लगाने के बारे में एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम को अंतिम रूप दे दिया है। स्थिति रिपोर्ट में कोर्ट से कई तरह के निर्देश भी मांगे गए हैं।

 

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, थानों में सीसीटीवी के लिए फंड के इस्तेमाल के मुद्दे पर बैठक बुलाए केंद्र

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *