मां की मृत्यु के बाद अपने मामा के साथ रह रहे दो बच्चे आगे मामा के साथ ही रहना चाहते हैं या पिता के साथ? इलाहाबाद हाईकोर्ट अब इन बच्चों से ही उनकी मंशा जानेगा। अदालत खुद बच्चों से बात करेगी और उनकी इच्छा जानेगी कि वे किसके साथ रहना चाहेंगे। हाईकोर्ट ने 24 जुलाई को दोनों बच्चों और उनके मामा को तलब किया है।
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर कोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट के जस्टिस संदीप जैन ने यह आदेश वाराणसी के एक पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है। पिता पेशे से डॉक्टर हैं। उन्होंने याचिका में कहा है कि 13 मई को फेफड़ों के कैंसर से उनकी पत्नी का निधन हो गया। इसके बाद उनकी पत्नी के भाई, यानी उनके साले दोनों नाबालिग बेटों को अपने साथ ले गए। बच्चों के मामा कई बार अनुरोध करने पर भी बच्चों को याचिकाकर्ता के पास नहीं भेज रहे हैं। उन्होंने शहर के प्रसिद्ध स्कूल में दोनों बेटों का एडमिशन दूसरी कक्षा में करा दिया है। उन्होंने दोनों बेटों की फीस भी जमा कर दी है। इससे साफ है कि वे बच्चों की शिक्षा और परवरिश की जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं।
सामान्य स्थिति में पिता ही हकदार
सरकारी वकील ने बताया कि, बच्चों ने पुलिस से बातचीत में में अपनी नानी और मामा के साथ रहने की इच्छा व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में मां के बाद जैविक पिता ही बच्चों की वैध अभिरक्षा के हकदार होते हैं, जब तक यह प्रमाणित न हो कि उनके साथ रहने में बच्चों का हित नहीं है। इस केस में ऐसा कोई सबूत मौजूद नहीं है जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि बच्चे पिता के साथ असुरक्षित रहेंगे। हाईकोर्ट ने कहा कि अभिरक्षा का अंतिम फैसला बच्चों से बातचीत और उनके सर्वोत्तम हित का आकलन करने के बाद ही होगा।
बच्चों और उनके मामा की 24 जुलाई को पेशी
हाईकोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगली तारीख 24 जुलाई को को दोनों बच्चों को हर हाल में पेश किया जाए। यदि ऐसा नहीं होता है तो संबंधित पुलिस अधिकारी को हलफनामा दाखिल करके बताना होगा कि आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ और बच्चों को पेश करने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए गए?

