दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि नशीले पदार्थों की तस्करी केवल नशे की लत का मामला नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक स्थिरता और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। कोर्ट ने कहा कि ड्रग्स के कारोबार से होने वाली अवैध कमाई संगठित अपराध को बढ़ावा देती है और कई मामलों में आतंकवादी गतिविधियों तक पहुंचती है। इसी टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने कमर्शियल मात्रा में चरस रखने के आरोपी एक व्यक्ति की नियमित जमानत याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।
कोर्ट ने खारिज की याचिका
अमर थापा की याचिका खारिज करते हुए जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा कि ड्रग तस्करी समाज की सामूहिक उत्पादकता और काम करने की क्षमता को कमजोर करती है। इससे युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है और अपराध का एक ऐसा नेटवर्क खड़ा होता है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन सकता है। अदालत ने कहा कि ऐसे अपराधों को केवल व्यक्तिगत अपराध के रूप में नहीं देखा जा सकता।
जनवरी 2025 में गिरफ्तार हुआ था आरोपी
मामले के अनुसार, अमर थापा को जनवरी 2025 में साउथ दिल्ली के कोटला मुबारकपुर इलाके से 1.516 किलोग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया गया था। यह मात्रा एनडीपीएस कानून के तहत कमर्शियल कैटेगरी में आती है।
बचाव पक्ष ने दी दलील
बचाव पक्ष ने दलील दी कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को लिखित आधार उपलब्ध नहीं कराए गए, इसलिए उसे जमानत मिलनी चाहिए। लेकिन हाई कोर्ट ने माना कि जांच अधिकारी की तत्काल प्राथमिकता पूरे ड्रग नेटवर्क का पता लगाना और सप्लायर और रिसीवर तक पहुंचना था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने की टिप्पणी
कोर्ट ने यह भी कहा कि नेपाल निवासी आरोपी को रिहा करने पर उसके फरार होने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की आशंका है, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। कोर्ट ने दोहराया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक महत्वपूर्ण मौलिक अधिकार है, लेकिन जब मामला समाज और देश की सुरक्षा से जुड़ा हो तो अदालत को व्यापक सार्वजनिक हित को भी ध्यान में रखना पड़ता है। इन परिस्थितियों में आरोपी को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।

