पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे देश भर में पेपर लीक मामलों की समय-सीमा के भीतर जांच और तेजी से सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए एक मानक प्रश्नावली और विशेष जांच प्रक्रिया तैयार करें। अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर याचिका में भ्रष्टाचार विरोधी, मनी लॉन्ड्रिंग, बेनामी संपत्ति और काले धन कानूनों के प्रावधानों को लागू करने के अलावा, पेपर लीक के अपराधियों और अपराध में कथित रूप से शामिल उनके परिवार के सदस्यों की चल और अचल संपत्तियों की जब्ती के लिए निर्देश देने की भी मांग की गई है।
याचिका में, जिसमें केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, साथ ही भारत के विधि आयोग को प्रतिवादी बनाया गया है, यह तर्क दिया गया है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक के देशव्यापी प्रभाव होते हैं, जिससे छात्र और उनके परिवार गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं। याचिका में कहा गया है, ‘पेपर लीक का देशव्यापी असर हुआ है, जिससे छात्रों और उनके परिवारों पर बुरा असर पड़ा है और कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली है।’
याचिका के अनुसार, पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों को रोकने, जांच करने और प्रभावी ढंग से मुकदमा चलाने में अधिकारियों की लगातार विफलता के परिणामस्वरूप संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों का लगातार उल्लंघन हो रहा है।
याचिका में 3 मई, 2026 को कथित एनईईटी पेपर लीक का जिक्र करते हुए कहा गया कि इस घटना ने लाखों छात्रों को प्रभावित किया और परीक्षा संबंधी अपराधों से निपटने में प्रणालीगत कमियों को उजागर किया। जनहित याचिका में दावा किया गया है कि बार-बार पेपर लीक की घटनाओं के कारण छात्रों को वित्तीय कठिनाई, शैक्षिक और रोजगार के अवसरों की हानि, गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्याएं, बढ़ती आत्महत्याओं का बोझ झेलना पड़ रहा है।

