इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय पर आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर चल रहा विवाद अब और गंभीर हो गया है। पटियाला हाउस की एक मैजिस्ट्रेट अदालत ने एक प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के आदेश देते हुए कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि कुत्ते को एयरपोर्ट परिसर से हटाने वाले ड्राइवर की पहचान जानबूझकर छिपाई गई। अदालत ने इसे सरकारी कर्मचारी को गलत जानकारी देने का मामला भी माना है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कॉन्ट्रैक्टर पर पुलिस कार्रवाई के दिए आदेश
अडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट प्रणव जोशी ने रशिम शर्मा बनाम GMR एयरपोर्ट्स लिमिटेड मामले में 11 जून को सुनवाई के दौरान जे.के. कॉन्ट्रैक्टर की स्टेटस रिपोर्ट और जवाब पर गौर किया।
कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि कॉन्ट्रैक्टर ने उस व्यक्ति की पहचान उजागर नहीं की, जिसने कथित तौर पर कुत्ते को हटाया था।
आदेश में अहम टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि आवारा और नसबंदी किए गए कुत्तों को पकड़ने या हटाने का अधिकार केवल स्थानीय निकायों, जैसे MCD या NDMC, के पास है।
कोई निजी एजेंसी या कॉन्ट्रैक्टर यह काम अपने स्तर पर नहीं कर सकता।
इसी आधार पर अदालत ने IGI एयरपोर्ट थाने के SHO को निर्देश दिया कि सरकारी कर्मचारी को जानकारी देने से इनकार करने और भ्रामक जानकारी देने के आरोप में कॉन्ट्रैक्टर के खिलाफ नया कलंदरा तैयार किया जाए।
मैनेजमेंट एग्रीमेंट और CCTV फुटेज पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान GMR एयरपोर्ट्स और जे.के. कॉन्ट्रैक्टर के बीच हुए कथित मैनेजमेंट एग्रीमेंट पर भी सवाल उठे। अदालत ने शिकायतकर्ताओं को रिकॉर्ड पर मौजूद CCTV फुटेज देखने की अनुमति भी दी, लेकिन साफ कहा कि फुटेज सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंच पर शेयर न किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 11 जुलाई को है।

