कोलकाता | 8 जुलाई 2026
Calcutta High Court ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी आरोपी को आपराधिक जांच के दौरान सार्वजनिक रूप से घुमाना या लोगों के सामने प्रदर्शित करना कानूनन स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा करना आरोपी के मानवाधिकारों और उसकी गरिमा का उल्लंघन है।
यह टिप्पणी तृणमूल कांग्रेस के नेता Soukat Molla की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान की गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उन्हें सार्वजनिक रूप से पेश किया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और मौलिक अधिकार प्रभावित हुए।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Kishore Datta ने दलील दी कि हाल के वर्षों में जांच एजेंसियों द्वारा आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जबकि कानून ऐसी प्रक्रिया की अनुमति नहीं देता। उन्होंने कहा कि आरोपी के साथ कानून के अनुसार गरिमापूर्ण व्यवहार किया जाना चाहिए।
वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपी को केवल घटना स्थल पर अपराध के पुनर्निर्माण (Crime Scene Reconstruction) और घटनास्थल की पहचान के लिए ले जाया गया था। उस समय वहां आम लोगों की भीड़ मौजूद थी, लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखा और किसी भी अप्रिय घटना को नहीं होने दिया।
राज्य ने यह भी बताया कि आरोपी पर सामूहिक दुष्कर्म (Gang Rape) का आरोप है तथा प्रारंभ में उसे National Investigation Agency ने हिरासत में लिया था, जिसके बाद राज्य पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि उसके समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट में आरोपी के विरुद्ध लगाई गई धाराओं का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। साथ ही, याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि प्राथमिकी में नामजद मुख्य आरोपी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक रूप से कहा, “आरोपी को सार्वजनिक रूप से घुमाना स्वीकार्य नहीं है। यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है।”
हालांकि, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आपराधिक कार्यवाही को रद्द (Quash) करने की मांग पर सवाल उठाए। न्यायालय ने कहा कि जब याचिकाकर्ता पहले से न्यायिक हिरासत में है, तब इस स्तर पर कार्यवाही समाप्त करने का क्या आधार है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मामले के तथ्य अत्यंत गंभीर हैं।
फिलहाल न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है और अगली सुनवाई तक मामले को स्थगित कर दिया है।
(यह समाचार न्यायालय में हुई कार्यवाही पर आधारित है। मामले का अंतिम निर्णय आना शेष है।)

