दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मंगलवार को उस पिटबुल कुत्ते के मालिक को नोटिस जारी कर दिया जिसने पिछले महीने उत्तर-पश्चिम दिल्ली के प्रेम नगर में 6 साल के बच्चे पर जानलेवा हमला किया और उसका दायां कान काट लिया।
इसके साथ ही, कोर्ट ने गुस्से में दिल्ली नगर निगम (MCD) और पुलिस की लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी की और कहा कि प्रशासन को समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए थी। जज सचिन दत्ता ने फटकार लगाते हुए कहा कि सरकार को निगम के साथ मिलकर इस समस्या से निपटने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। जज ने बताया कि याचिका के मुताबिक यह कुत्ता पहले भी कई बार हमला कर चुका है और इसकी शिकायतें पुलिस में दर्ज हैं, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कोर्ट ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश
कोर्ट ने मामले में सख्ती दिखाते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। कोर्ट ने निर्देश दिए कि पिटबुल को तब तक रिहा न करने का आदेश है, जब तक समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के पर्याप्त इंतजाम न हो जाएं। सफदरजंग अस्पताल को निर्देश दिया गया है कि बच्चे का इलाज निरंतर और उचित ढंग से किया जाए।
जज सचिन दत्ता ने साफ किया कि बच्चे के इलाज का पूरा खर्च पिटबुल के मालिक को ही उठाना होगा। साथ ही, पुलिस को जांच में तेजी लाने और अगली सुनवाई की तारीख तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
क्या था पूरा मामला?
दरअसल हुआ यूं था कि 23 नवंबर को प्रेम नगर में अचानक पिटबुल ने 6 साल के बच्चे पर हमला बोल दिया। कुत्ते ने बच्चे का दायां कान काट लिया और गंभीर चोटें पहुंचाईं। पड़ोसियों और परिजनों ने किसी तरह बच्चे को छुड़ाया और पहले BSA अस्पताल, रोहिणी और फिर सफदरजंग अस्पताल ले गए। बच्चे को बाद में डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन इलाज अभी भी चल रहा है और बार-बार अस्पताल जाना पड़ रहा है।
25 लाख रुपये के मुआवजे की मांग
बच्चे के पिता ने हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में बताया कि उनका परिवार आर्थिक रूप से बहुत कमजोर है और इस घटना से वे मानसिक रूप से बहुत प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कोर्ट से तीन प्रमुख राहतें मांगी हैं। पिता ने दिल्ली नगर निगम और पुलिस की घोर लापरवाही के लिए कम से कम 25 लाख रुपये का मुआवजा, अपने बेटे का पूरी तरह मुफ्त और उचित इलाज, तथा पिटबुल जैसी खतरनाक नस्ल के कुत्तों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग रखी।
भावुक अपील करते हुए पिता ने कोर्ट को कहा कि मुझे अपना मासूम बच्चा अस्पताल में दर्द, सदमे और डर से तड़पते हुए देखना पड़ा। इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी, यह पूरी तरह जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और कर्तव्य में चूक का नतीजा है।
MCD वकील ने क्या दावा किया?
MCD के वकील तुषर सानू ने बताया कि घटना के तुरंत बाद कुत्ते को पकड़ लिया गया और उसे पशु देखभाल केंद्र में रखा गया है। कुत्ता अनरजिस्टर्ड था। दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है और जांच चल रही है। इसके अलावा कोर्ट ने साफ कहा कि मुआवजे का मुख्य दावा कुत्ते के मालिक के खिलाफ होना चाहिए।

