इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकाधिग्रहण मामले में आदेश का पालन न करने पर अवमानना मानते हुए उन्हें एक माह का अंतिम मौका दिया है। साथ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, नगर विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रयागराज के डीएम को एक माह में आदेश का पालन कर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। ऐसा नहीं करने पर अगली सुनवाई पर पांच जनवरी को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना पड़ेगा।रियों की ओर से भूमि अ
यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय की खंडपीठ ने दिया है। प्रयागराज निवासी विनय कुमार सिंह की भैरोपुर गांव स्थित जमीन का 1977 में अधिग्रहण किया गया था। दावा था कि उन्हें मुआवजा नहीं मिला है और वह जमीन पर काबिज हैं। ऐसे में उनकी जमीन अधिग्रहण से मुक्त की जाए। इस संबंध में 2015 में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने 27 जुलाई 2016 को याची की जमीन मुक्त करने का आदेश दिया था। सरकार की विशेष अनुमति याचिका सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2017 में खारिज कर दी थी।
कोर्ट के आदेश का पालन न होने पर याची ने अवमानना अर्जी दायर की है। मई 2022 में मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि एक सप्ताह में आदेश का पालन कर लिया जाएगा पर ऐसा हुआ नहीं। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की एसएलपी खारिज कर दी थी और कोई पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की गई है। इसलिए हाईकोर्ट का आदेश पक्षों के लिए अंतिम और बाध्यकारी है।
कोर्ट ने कहा कि राज्य के विभिन्न विभाग प्रशासनिक सुविधा के लिए हैं और उनके बीच जिम्मेदारी का टालमटोल कोर्ट के आदेश की अवहेलना का बहाना नहीं बन सकता। ऐसे में कोर्ट के आदेश का पालन सरकारी मशीनरी में किसी भ्रम या गड़बड़ी की वजह से नहीं होता है तो संबंधित विभाग के अधिकारी की जिम्मेदारी प्रमुख सचिव पर आएगी और वही अवमानना के लिए भी जिम्मेदार होंगे।

