नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी महीने में कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगाने के साथ ही चार सदस्यों वाली एक कमेटी बनाई थी। जिसमें ये तय किया गया था कि समिति कृषि कानूनों का समर्थन करने वाले और विरोध करने वाले किसानों का पक्ष सुनकर दो महीने के भीतर कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। अब समिति ने अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है।
ज्ञात हो कि, इस कमेटी में, किसान नेता अनिल घनवट के अलावा भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, कृषि-अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी और प्रमोद कुमार जोशी को इस समिति का सदस्य बनाया गया। लेकिन बाद में भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान ने कमिटी से नाम वापस ले लिया था। जिसके बाद इसमें तीन सदस्य रह गए।
इस रिपोर्ट को लेकर ये दावा किया जा रहा है कि कमेटी ने किसान संगठनों और कृषि मामलों के जानकारों से बात कर के ही अपनी रिपोर्ट तैयार की है। और रिपोर्ट में संसद की तरफ से पारित किए गए कृषि कानूनों की समीक्षा की गई है। मालूम हो कि केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर करीब 4 महीनों से किसानों का प्रदर्शन जारी है। तीनों कृषि कानून वापस लेने की मांग को लेकर किसान नवंबर 2020 से गाजीपुर, टीकरी और सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

