इस साल की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत कल , 36 हज़ार मामलों की होगी सुनवाई

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) नई दिल्ली के निर्देश पर पूरे देश में आज राष्ट्रीय लोक अदालत लगेगी। यह इस साल (2021) की पहली लोक अदालत होगी। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) नई दिल्ली के निर्देश पर पूरे देश में लगी हैं। इसके लिए 36026 मामले चिन्हित किए गए हैं। जिसमें राजीनामा योग्य प्रकरणों को…

इस साल की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत कल ,  36 हज़ार मामलों की होगी सुनवाई


राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) नई दिल्ली के निर्देश पर पूरे देश में आज राष्ट्रीय लोक अदालत लगेगी।

यह इस साल (2021) की पहली लोक अदालत होगी। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) नई दिल्ली के निर्देश पर पूरे देश में लगी हैं। इसके लिए 36026 मामले चिन्हित किए गए हैं। जिसमें राजीनामा योग्य प्रकरणों को पक्षकारों की आपसी सुलह समझौता से निराकृत कराया जाएगा। नालसा ने CG मॉडल को अपनाते हुए इसे पूरे देश में लागू किया है।

दरअसल, कोरोना संक्रमण को देखते हुए बिलासपुर में पहली बार ई-लोक अदालत का आयोजन 11 जुलाई 2020 को किया गया था। इस आयोजन और पहल को देखकर नालसा ने पूरे देश में मॉडल के रूप में लागू किया। अब राज्य के तालुका से लेकर हाईकोर्ट तक सभी न्यायालयों में मामलों की सुनवाई होगी। लोक अदालत के लिए 322 खंडपीठ गठित की गई है। राज्य के सभी जिला न्यायालयों ने प्री-लिटिगेशन के 12078 प्रकरण, लंबित के 23474 प्रकरण, हाईकोर्ट के 474 कुल 36026 लंबित प्रकरण चिह्नांकित किए गए हैं।


 विशेष न्यायाधीशों की नियुक्ति का है निर्देश

हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा के निर्देश पर इस बार लोक अदालत में विशेष न्यायाधीश को नियुक्त करने की शक्ति दी है। ये IPC की धारा 188 के अंतर्गत आने वाले छोटे अपराधों खासकर शासन के निर्देशों और आदेशों के अवहेलना पर दर्ज मामलों का निराकरण करेंगे। लोक अदालत में पक्षकार अपने पास के व्यवहार न्यायालय, जिला न्यायालय या विधिक सेवा संस्थान से संपर्क कर अपने मामलों में सीधे और वर्चुअल तौर से भी जुड़ सकते हैं।


रखे जाएंगे ये मामले 

लोक अदालत में फैमिली कोर्ट, स्थायी लोक अदालत, श्रम न्यायालयों के प्रकरण, बैंक वसूली, बिजली, पानी, श्रम न्यायालय, मोटर दुर्घटना के प्रकरण, वैवाहिक मामले, धारा 138 चेक बाउंस के मामले, सभी सिविल मामले जो न्यायालय में लंबित हैं। इसके अलावा ऐसे मामले जो न्यायालय में अभी पेश नहीं हुए हैं (प्री-लिटिगेशन) को निराकृत किया जाएगा। इसके साथ ही पक्षकारों के बीच लोक अदालत की तारीक के पूर्व प्री-सिटिंग के माध्यम से भी प्रकरणों को निराकृत किए जाएंगे।

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