छतरपुर के सतबड़ी गांव में तोड़फोड़ अभियान के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित नियमों की अनदेखी के आरोपों पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। कोर्ट ने संबंधित अथॉरिटी को निर्देश दिया कि इस बीच याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों के खिलाफ किसी भी तरह की कड़ी कार्रवाई नहीं की जाए। जस्टिस विकास महाजन ने बुधवार को संबंधित संपत्ति मालिकों की याचिका पर DDA को नोटिस जारी किया।
बता दें कि अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। कोर्ट ने कहा कि इस बीच, माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा संरचनाओं की तोड़फोड़ के मामले में पारित निर्देशों (सुप्प्रा) और याचिकाकर्ताओं के वकील कुश शर्मा की दलीलों को ध्यान में रखते हुए, यह निर्देश दिया जाता है कि अगली सुनवाई की तारीख तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।
शर्मा ने बुधवार को चीफ जस्टिस की कोर्ट में मामले का जिक्र किया और इसे तत्काल सुने जाने की गुहार लगाई। इसके बाद इसे उसी दिन जस्टिस महाजन की कोर्ट में लगा दिया गया। देर शाम तक बैठी कोर्ट ने मामले को सुना और शाम को ही उक्त आदेश पारित किया। विष्णु माया और तीन अन्य ने एडवोकेट विनीत नागर के जरिए याचिका दायर की, जिसमें DDA के खिलाफ आदेश जारी करने की मांग की गई, ताकि उसे इनकी संपत्तियों को तोड़ने और उन पर कथित तौर पर अवैध कब्जा करने से रोका जा सके।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, ऐसा केवल कानून की उचित प्रक्रिया के जरिए ही होना चाहिए। याचिका में आरोप लगाया गया कि DDA ने किसी भी स्थापित कानूनी सिद्धांतों का पालन किए बिना और याचिकाकर्ताओं को कोई भी नोटिस दिए बिना, आज सुबह यानी 9 जुलाई, 2025 को याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों पर हमला किया और संबंधित संपत्ति की सामने की दीवार को तोड़ दिया।
याचिका के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं को धमकी दी गई कि आज ही उनका पूरा घर तोड़ दिया जाएगा और DDA संबंधित संपत्तियों पर जबरन कब्जा कर लेगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश कुश शर्मा ने कोर्ट को बताया कि DDA ने सुबह लगभग 6 बजे पर्याप्त पुलिस बल के साथ सतबड़ी गांव में प्रवेश किया, जहां याचिकाकर्ताओं की संपत्तियां मौजूद है।

