हिसार। बेटे की मौत के बाद मुआवजे की आस में मां-बाप ने 22 साल कानूनी लड़ाई लड़ी…आखिरकार 8 अक्तूबर को हक में फैसला आया। बढ़ा हुआ मुआवजा मिला, ब्याज समेत रकम बैंक खाते में जमा हो गई मगर विडंबना देखिए कि मुआवजा राशि पाने वाले हाथ अब इस दुनिया में नहीं थे। मामला वर्ष 2001 में सड़क हादसे में शक्ति सिंह की मौत से जुड़ा है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता जगबीर दलाल ने बताया कि 15 मार्च, 2001 को मुल्तानी चौक निवासी जयप्रकाश का बेटा शक्ति सिंह साइकिल से घर लौट रहा था। सिरसा रोड पर मछली प्रजनन केंद्र के पास एक वैन ने उसे पीछे से टक्कर मार दी। वैन को शिवनाथ चला रहा था। गंभीर घायल शक्ति को पहले सामान्य अस्पताल और फिर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन 16 मार्च को उसकी मौत हो गई। बेटे को खोने के बाद पिता जयप्रकाश व मां परमेश्वरी देवी ने मुआवजे के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, हिसार की अदालत ने 14 जून, 2004 को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया और राशि 12 महीने के लिए सावधि जमा में रखने के लिए कहा। यह रकम जयप्रकाश और परमेश्वरी देवी को एक साल बाद मिली।
