दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि अस्पताल और मॉल्स जैसी व्यवसायिक इमारतें लोगों से पार्किंग शुल्क वसूल सकती हैं। इसके साथ ही अदालत ने दिल्ली नगर निगम (MCD) के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उसने कहा था कि इन इमारतों को तकनीकी रूप से इस तरह के शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं है। फैसला सुनाते हुए अदालत ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के दिए फैसले का हवाला भी दिया। उधर MCD ने अपने दावे के समर्थन में अदालत को बताया था कि ऐसी व्यवसायिक इमारतें इसलिए पार्किंग शुल्क नहीं ले सकतीं, क्योंकि इन इमारतों के कुल क्षेत्रफल (जिसे फ्लोर एरिया रेशो या FAR भी कहा जाता है) में पार्किंग क्षेत्र को नहीं गिना जाता है, हालांकि अदालत ने नगर निगम के इस तर्क को नहीं माना और इसे दोषपूर्ण बताया।जस्टिस मिनी पुष्करणा ने यह फैसला इंद्रप्रस्थ मेडिकल कॉर्पोरेशन की तरफ से दायर एक मामले की सुनवाई करते हुए सुनाया।
यह कम्पनी सरिता विहार स्थित अपोलो अस्पताल का संचालन करती है। जज ने कहा कि यह मुद्दा नवंबर 2023 में इसी तरह के एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान ही सुलझ गया था, तब अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि पार्किंग के लिए शुल्क लेने की अनुमति है।वर्तमान मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पहले के फैसले में ही स्पष्ट किया गया था कि दिल्ली के 2021 के मास्टर प्लान में सिटी प्लानिंग रूल्स (नगर नियोजन नियम) के अंतर्गत पार्किंग शामिल है, और कारोबारी पार्किंग उपलब्ध कराने के लिए शुल्क ले सकते हैं। सु्प्रीम कोर्ट ने भी अप्रैल 2024 MCD की अपील को खारिज कर दिया था, जिसके बाद यही फैसला अंतिम हो गया था।
निर्णय देने के बाद अदालत ने कहा कि इस फैसले के आधार पर लीज समझौतों में कुछ बदलाव की जरूरत हो सकती है और इसके साथ ही कोर्ट ने अपोलो अस्पताल को ऐसे जरूरी बदलावों का अनुरोध करने की अनुमति भी दे दी। इसके साथ ही अदालत ने इस मामले और इससे संबंधित अन्य मामलों को बंद कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील डॉ. ललित भसीन और उनकी टीम ने अपोलो अस्पताल का पक्ष रखा, जबकि एमसीडी का पक्ष वकील सिद्धार्थ गुप्ता ने प्रस्तुत किया।

