नई दिल्ली। तेलंगाना में 13 सिटिंग MLAs के खिलाफ केस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि केंद्रीय एजेंसियों के पास जो मामले हैं। उसमें दो-तीन दशक से मामले लंबित हैं, सरकार क्या कर रही है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में CBI, ED और दूसरी जांच एजेंसी और राज्य की एजेंसी FIR तो दर्ज करती हैं लेकिन उन मामलों पर आगे की कार्यवाही नहीं होती। दशकों से सांसदों और विधायकों पर आपराधिक मामले लंबित होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में वह विस्तृत आदेश जारी करेगा।
40 साल तक पुराने मामले लंबित
पूरे देश में पूर्व और वर्तमान सांसदों व विधायकों के विरुद्ध 4600 से ज्यादा आपराधिक मुकदमें लंबित है। जिनमे से कई मामले 40 साल पुराने भी हैं, वहीं कई मामलों में अभी तक आरोप तय नहीं हो पाया हैं।
केंद्र ने समय सीमा तय करने का दिया सुझाव
इस पर केंद्र ने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट चाहे तो सांसदो और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों में मुकदमों की सुनवाई के लिए समय सीमा भी तय कर सकता है। केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से सांसदों व विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले में सुनवाई में तेजी लाने को लेकर जो भी फैसला आएगा वह उसका स्वागत करेगी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र एमाइकस क्यूरी ने हर जिले में एक कोर्ट बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में 13 वर्तमान विधायकों के खिलाफ केस दर्ज हैं। और विभिन्न राज्यों से कई मामले हैं जो केंद्रीय एजेंसियों को स्थानांतरित किए गए हैं । जिसमे यूपी ,तेलंगाना, मध्य प्रदेश, समेत कई राज्य हैं।
विशेष न्यायाधीश की नियुक्ति , सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिया सुझाव
उन्होंने कहा कि ,अगर राज्य में एक कोर्ट बनाए जाए गई तो मामलों पर जल्द सुनवाई नहीं हो पाएगी क्योंकि कई राज्य ऐसे हैं, जहां 300 से ज्यादा केस हैं। इसके लिए स्पेशल जज को नियुक्त किया जाए जो मामलों की सुनवाई करें, क्योंकि अगर राज्य में एक कोर्ट बनाने से मामलों पर शीघ्र सुनवाई नहीं हो पाएगी। क्योंकि कई राज्यों में 300 से अधिक केस हैं, इसलिए एक राज्य के लिए एक कोर्ट बनाना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिन राज्यों में एक दो मामले ही लंबित है। वहां हाई कोर्ट उन मामलों पर कार्यवाही करे। इसके लिए अदालत जैसा निर्देश करेगी केंद्र कोष जारी करेगा।

