प्रवासी मजदूरों को राशन मुहैया करवाए सरकार : SUPREME COURT

 लॉकडाउन की वजह से परेशानी का सामना कर रहे प्रवासी मजदूरों को राहत पहुंचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने  दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में आने वाले जिलों में सामूहिक रसोई खोली जाए ताकि मजदूर और उनके परिवार दो वक्त का खाना खा सकें। मजदूरों से…

प्रवासी मजदूरों को राशन मुहैया करवाए सरकार :  SUPREME COURT

 लॉकडाउन की वजह से परेशानी का सामना कर रहे प्रवासी मजदूरों को राहत पहुंचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने  दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में आने वाले जिलों में सामूहिक रसोई खोली जाए ताकि मजदूर और उनके परिवार दो वक्त का खाना खा सकें।


मजदूरों से पहचान पत्र मांगने जैसी बाध्यता न रखी जाए

कोर्ट ने कहा कि केंद्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकार NCR के प्रवासी मजदूरों को राशन मुहैया करवाए। ये राशन आत्म भारत स्कीम या किसी भी अन्य स्कीम के तहत दिया जा सकता है। इसके लिए मजदूरों से पहचान पत्र मांगने जैसी बाध्यता न रखी जाए।

सोशल एक्टिविस्ट ने दाखिल की थी याचिका 

एक्टिविस्ट हर्ष मंदर, अंजलि भारद्वाज और जगदीप चोकर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कोर्ट से अपील की थी कि फूड सिक्योरिटी और कैश ट्रांसफर के अलावा दूसरे निर्देश तत्काल जारी किए जाने चाहिए। जिस पर वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने पिछले साल एप्लिकेशन दी थी। 


प्रशांत भूषण ने याचिका पर सुनवाई के दौरान क्या कहा

प्रशांत भूषण ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि हम केंद्र की आत्म निर्भर भारत स्कीम दोबारा शुरू किए जाने के लिए लड़ रहे हैं। इसके तहत 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों को राशन देने की योजना थी, जो कि नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट या राज्य की पीडीएस कार्ड योजना के तहत कवर नहीं होते हैं। इस स्कीम को पिछले साल शुरू किया गया था, जब प्रवासी मजदूरों की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ गई थी, लेकिन ये केवल दो महीने तक चली। यानी जून 2020 तक। इसके बाद इसे बंद कर दिया गया था। इस बार उनके पास फिर रोजगार नहीं है और न पैसा है। कम से कम आत्मनिर्भर भारत योजना और प्रवासी ट्रेनों पर तो विचार किया ही जाना चाहिए।

जस्टिस एमआर शाह ने भूषण से कहा कि लॉकडाउन की स्थिति में मजदूर अपने गांव वापस जाने की सोचता है। कई मजदूर चले भी गए हैं। कई मजदूर चार-पांच गुना ज्यादा किराया देकर गांव लौटे हैं और कइयों की तो जान भी चली गई है। अब जो मजदूर नहीं गए हैं, उनके बारे में हम सोच रहे हैं। हमें फाइनेंशियल निर्देश देने की भी याचिकाएं मिली हैं। पर अभी हमें केंद्र से जवाब मिलना बाकी है। हम दिल्ली-एनसीआर के बारे में कुछ निर्देश जारी कर सकते हैं ताकि यहां कुछ व्यवस्थाएं की जा सकें।

केंद्र सरकार ने याचिका का किया विरोध  

केंद्र सरकार ने याचिका का किया विरोध करते हुए कहा केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि सभी राज्य सरकारें हालात से वाकिफ हैं। अभी हम महामारी से लड़ रहे हैं। अभी हमें महामारी से लड़ने दीजिए, दूसरी चीजों से नहीं। जैसा पहली बार लॉकडाउन था, वैसा इस बार नहीं है। ज्यादातर इंडस्ट्रीज काम कर रही हैं, कंस्ट्रक्शन वर्क की इजाजत है। मजदूरों को ऐसी जगह से वापस गांव लौटने को बढ़ावा नहीं देना चाहिए, जहां इंडस्ट्री खुली हुई हैं। पिछली बार तो सब कुछ बंद था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कहा- प्रवासी मजदूर बिना पैसे और रोजगार के कैसे गुजर-बसर करेंगे? फिलहाल कुछ तो सहारा दिया जाना चाहिए। आपको कठोर सच्चाईयों को समझना ही होगा। तुरंत राहत को तुरंत दिया जाना जरूरी है।

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