हाईकोर्ट जजों के रूप में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं की नियुक्ति संविधान के विपरीत

Edited by Abhinav soni नई दिल्ली। आल इंडिया लायर्स यूनियन के हाईकोर्ट इकाई के सचिव आशुतोष कुमार तिवारी ने हाईकोर्ट जजों के रूप में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं की नियुक्ति के प्रस्ताव को संविधान के अनुच्छेद 217(2)(ख) के विपरीत बताया है। और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रस्ताव पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि, …

हाईकोर्ट जजों के रूप में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं की नियुक्ति संविधान के विपरीत


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Abhinav soni

नई दिल्ली। आल इंडिया लायर्स यूनियन के हाईकोर्ट इकाई के सचिव आशुतोष कुमार तिवारी ने हाईकोर्ट जजों के रूप में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं की नियुक्ति के प्रस्ताव को संविधान के अनुच्छेद 217(2)(ख) के विपरीत बताया है। और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रस्ताव पर नाराजगी जताई है।


उन्होंने कहा कि, 

अनुच्छेद 217(2)(ख) के अनुसार उच्च न्यायालय में न्यूनतम 10 वर्ष वकालत करने वाले अधिवक्ता ही, उच्च न्यायालय में जज नियुक्त होने के लिए पात्र हैं। और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकार्ड बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के एतिहासिक प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान की इसी भावना को माना है। कॉलेजियम हाईकोर्ट में वकालत करने वाले अधिवक्ताओं को ही हाईकोर्ट जज के रूप में प्रस्तावित करती है।


सुप्रीम कोर्ट बार के इस प्रस्ताव के अनुसार जज ऊपर से थोपे जाएंगे जो उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार के लिए अनुभवी नहीं रहेगें। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमणा से सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर उसे खारिज करने की मांग की है। 

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