मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में वकील ने अचानक पासा पलट दिया। वकील ने जज के सामने खड़े होकर साफ कहा कि वह कुल आठ आरोपियों में से छह की जमानत याचिका तुरंत वापस लेना चाहते हैं। कोर्ट रूम में मौजूद हर शख्स यह सुनकर हैरान था कि कोई वकील खुद अपने मुवक्किलों को छह महीने और जेल में रखने की वकालत कैसे कर सकता है।
वकील ने क्यों चली यह चाल?
दरअसल, रीवा जिले में दो पक्षों के बीच जमकर लाठी-डंडे चले थे। इस ‘फ्री फाइट’ में दोनों तरफ के लोगों को चोटें आईं। घर में घुसकर जान से मारने की धमकी और मारपीट के इस मामले में कुल नौ आरोपी थे। इनमें से एक नाबालिग को जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड पहले ही छोड़ चुका था। बाकी बचे आठ आरोपियों की तरफ से कोर्ट में बहस चल रही थी। तभी वकील ने रणनीति बदली और कोर्ट से कहा कि छह आरोपियों को छह महीने की सजा काटने के बाद दोबारा अर्जी लगाने की छूट दी जाए, लेकिन बाकी दो बुजुर्ग आरोपियों को राहत मिले।
सरकारी वकील का कड़ा विरोध
सुनवाई के दौरान सरकारी और विरोधी पक्ष के वकीलों ने इस जमानत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि घायलों के शरीर में कई जगह फ्रैक्चर आए हैं, अपराध की प्रकृति बेहद गंभीर है, इसलिए इन्हें राहत नहीं मिलनी चाहिए। इस पर बचाव पक्ष ने काउंटर किया कि यह दोनों तरफ से हुआ झगड़ा था और जिन दो लोगों की जमानत मांगी जा रही है, उनका कोई पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है। वे 11 मई 2026 से ही जेल की सलाखों के पीछे हैं।
जज साहब का फैसला
दोनों पक्षों की तीखी बहस सुनने के बाद जस्टिस ए के निरंकारी की सिंगल बेंच ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने पाया कि 45 वर्षीय गणेश हलवाई और उनके 50 साल के साथी का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है। कोर्ट ने दोनों को 50-50 हजार रुपये के निजी बांड और इतनी ही सॉल्वेंट श्योरिटी जमा करने पर जमानत दे दी। कोर्ट ने शर्त रखी है कि ट्रायल के दौरान दोनों को हर पेशी पर हाजिर होना पड़ेगा।

