अभी हमें नहीं पता कितनी प्रयोगशालाओं की जरूरत है : केंद्र
मेहता ने कहा कि अभी हालात लगातार बदल रहे हैं और इन परिस्थितियों में हमें कितनी प्रयोशालाओं की जरूरत होगी और यह लॉकडाउन कितना लंबा चलेगा। इस पर बेंच ने कहा- केंद्र को यह निश्चित करना चाहिए कि निजी लैब जांच के लिए ज्यादा पैसे ना लें और साथ ही ऐसा मैकेनिज्म भी बनाएं, जिसके जरिए जांच के लिए ली गई फीस की वापसी की व्यवस्था हो।
फीस कि सीमा तय करने याचिकाकर्ता ने उठाया था सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर 3 अप्रैल को भी सुनवाई की थी और केंद्र से जवाब मांगा था। याचिकाकर्ता ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) द्वारा जांच की फीस की सीमा 4 हजार 500 रुपए तय किए जाने पर भी सवाल उठाया था, साथ ही जांच सुविधाओं के जल्द विस्तार की भी मांग की थी। आम आदमी के लिए सरकारी अस्पतालों और प्रयोगशालाओं में जांच कराना मुश्किल है और ऐसे में वे निजी प्रयोगशालाओं और अस्पतालों में आईसीएमआर द्वारा तय की गई फीस देकर जांच करवाने के लिए विवश होंगे। याचिकाकर्ता ने कहा कि जांच ही एक रास्ता है, जिसके जरिए महामारी को रोका जा सकता है। अधिकारी पूरी तरह से इस हाल से पूरी तरह अनभिज्ञ और असंवेदनशील हैं कि आम आदमी पहले से ही लॉकडाउन के चलते आर्थिक दिक्कतों का सामना कर रहा है।
NTF ने की थी 4 हजार 500 रुपए फीस की अनुशंसा
कोरोनावायरस के लिए बनी नेशनल टास्क फोर्स की अनुशंसा पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने टेस्ट के संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया था। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि कोरोना संक्रमण की जांच की फीस 4 हजार 500 रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसमें 1500 रुपए कोरोना संदिग्ध के स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए और संक्रमण की जांच के लिए किए जाने वाले टेस्ट की फीस 3 हजार रुपए तय की गई थी।

