Edited by
Adv. Pratap Singh
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण फैसला करते हुए लंबे अरसे से लंबित ‘मॉडल किरायेदारी अधिनियम’ को पारित कर दिया हैं। इसके साथ ही इस नए मॉडल टेनेंसी एक्ट को अपनाने और न अपनाने की छूट राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों और प्रशासकों पर छोड़ दी गई है। यहां यह भी बता दें कि इस नए एक्ट के लागू होने से किराएदारी से संबंधित जो पुराने केस कोर्ट में चल रहे हैं, उन पर इसका कोई भी असर नहीं होगा।
केंद्र सरकार के द्वारा पारित इस ‘मॉडल किरायेदारी अधिनियम’ से मकान और दुकानों को किराये पर लगाना बहुत आसान हो जाएगा और मकान मालिक बिना किसी डर के अपनी प्रॉपर्टी को रेंट पर दे सकेंगे। क्योंकि इस नए कानून के तहत मकान मालिकों को पर्याप्त कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है। इस कानून में कुछ ऐसे प्रावधान है जिससे किरायेदार कानून का दुरुपयोग नहीं कर सकेंगे।
तय समय पर किराया न देने पर , दुगुना किराया
ज्ञात हो कि मकानों और दुकानों पर किरायेदारों के अवैध कब्जा हो जाने के डर से प्रॉपर्टी के मालिक अपने खाली पड़े प्रॉपर्टी को किराये पर लगाने से डरते हैं। ‘मॉडल किरायेदारी अधिनियम’ में दिए गए अधिकारों के अनुसार किरायेदार अगर तय समय के दो महीने के बाद भी किराया नहीं देता है तो प्रॉपर्टी का मालिक दोगुना किराया वसूल सकता है। ऐसे ही अवधि बढ़ने के साथ जुर्माना भी गुना के हिसाब से बढ़ते जाएगा। इसके साथ ही प्रॉपर्टी के रखरखाव की जिम्मेदारी को भी मकान मालिक और किरायेदार के बीच बांट दिया गया है। पूर्व में किरायेदार मेंटेनेंस का पूरा बोझ प्रॉपर्टी मालिक पर ही डाल देते थे। इस डर के कारण भी बहुत से मकान मालिक अपनी खाली पड़ी हुई प्रॉपर्टी को रेंट पर देने से बचते थे।
किराएदारों को भी होगा फायदा
ऐसा नहीं है कि इस नए एक्ट से सिर्फ मकान मालिकों को ही फायदा होगा। इस नए एक्ट में ऐसी बहुत सी बातें हैं जिससे किरायेदारों को भी राहत मिलेगी। इसी में से एक बात जो बड़े शहरों में किरायेदारों को बहुत सताती है वह है सिक्युरिटी मनी के रूप में वसूला जाने वाला पगड़ी, जोकि मुंबई जैसे शहरों में तो आसमान को छु रहा है। इस नए एक्ट में यह प्रावधान कर दिया गया है कि कोई भी मकान मालिक किराए के दोगुने से ज्यादा सिक्योरिटी मनी की डिमांड नहीं कर सकता है।
भारत में मकान मालिक और किरायेदार के बीच लगातार बढ़ते विवादों के बीच आया ‘मॉडल किरायेदारी अधिनियम’ स्वागतयोग्य है। यह मकान मालिकों और किरायेदारों के समस्या के समाधान का कार्य करेगा, ऐसी उम्मीद है। हालांकि इस एक्ट को लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर छोड़ दी गई है, मगर इसकी उपयोगिता को देखते हुए वे इसे जल्द लागू करने का प्रयास करेंगे।

