
रायपुर। आईटीएम यूनिवर्सिटी बालश्रम निषेध दिवस मनाया गया और “बाल श्रम निषेध” विषय पर (सहायक प्रोफेसर) श्यामली नायडू द्वारा वेबिनार का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता विद्या नंद मिश्रा उपस्थित रहें। वेबिनार की अध्यक्षता ( स्कूल ऑफ़ स्टडीज़ लॉ) की विभागध्यक्ष डॉ श्रद्धा पांडे ने की व संयोजक के रूप में सहायक प्रोफेसर श्यामली नायडू रही।
अधिवक्ता मिश्रा ने बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 की धारा 3,5,7,10,15 की जानकारी दी। साथ ही इस ब्रह्मांड में मानव जाति के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और जातीय विश्वास में पर्यावरण-संतुलन बनाए रखने के महत्व के बारे में भी बताया।
उन्होंने देशभक्ति गीत “हमलाये हैं तूफान से कशती निकल के देश को रखना मेरे बचाओ संभल के” का उदाहरण देकर बच्चो की भूमिका को समझाया। और कहा कि , बाल श्रम विरोध केवल एक वेबिनार के रूप में नहीं बल्कि व्यावहारिक रूप से भी लागू किया जाना चाहिए। और आने वाले कुछ वर्षों में भारत को बालश्रम रोधी देश बनने की भी बात कहीं।
वेबिनार का आयोजन असिस्टेंट प्रोफ़ेसर श्यामली नायडू द्वारा किया गया। स्कूल ऑफ लॉ के फैसिलिटी सदस्यों, रचना निगम , श्रीमती अंकिता विराज सुक्ला, श्री हिमांशु शुक्ला, श्री नितिन जायसवाल सहित अन्य 70 अन्य सदस्यों ने वेबिनार में भाग लिया। साथ ही समिति के सदस्य तनीश जैन, धरना जैन, जसजीत कौर भामरा, सौम्या संगम, दृष्टि छतानी, लिपिका गुप्ता और के. गंगोत्री डोरा ने भी वेबिनार को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।

