तीन विवादास्पद कृषि कानूनों की संवैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाली याचिकाएं केंद्र द्वारा कानून खारिज करने का नया बिल पारित करने या एक अध्यादेश लाने के बाद निरस्त हो जाएंगी। अहम बात ये है कि तीनों कानून या तो एक अध्यादेश या एक अधिनियम द्वारा निरस्त किया जाना है, न कि मौखिक बयान से। वरिष्ठ वकील और संवैधानिक कानून विशेषज्ञ राकेश द्विवेदी ने कहा कि या तो अध्यादेश जारी होने के बाद या संसद में अधिनियम पारित करने के बाद सभी याचिकाएं निष्फल हो जाएंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुरु नानक जयंती के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए घोषणा की कि, सरकार ने कृषि कानूनों को निरस्त करने का फैसला किया है। उन्होंने विरोध करने वाले किसानों से घर लौटने की अपील की।
12 अक्टूबर, 2020 को राज्यसभा से राजद विधायक मनोज झा, तमिलनाडु से द्रमुक के राज्यसभा सांसद तिरुचि शिवा और छत्तीसगढ़ किसान कांग्रेस के राकेश वैष्णव द्वारा दायर याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया था।इस साल 12 जनवरी को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने केंद्र के तीखे विरोध को खारिज करते हुए अगले आदेश तक कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी थी।

