केंद्र सरकार के अधीन नेशनल फिटनेस कॉर्पस जिन्हें बाद में हरियाणा सरकार ने अपना कर्मचारी बनाते हुए PTI शिक्षकों का दर्जा दिया था उनके वेतन से जुड़े विवाद में कोर्ट के आदेश का पालन न करना सरकार को भारी पड़ गया।
हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर 28 अगस्त तक आदेश का पालन नहीं हुआ तो वित्त विभाग व स्कूली शिक्षा विभाग के ACS (अतिरिक्त मुख्य सचिव) को कोर्ट में हाजिर होकर जवाब देना होगा।
याचिका दाखिल करते हुए मेवा सिंह और व अन्य ने बताया कि उन्हें केंद्र सरकार ने नेशनल फिटनेस कॉर्प के तौर पर भर्ती किया था। इसके बाद उनका प्रशासनिक नियंत्रण 1967 में विभिन्न राज्य सरकारों को दे दिया गया था। 1976 में सभी राज्य सरकारों ने इन शिक्षकों को PTI के तौर पर राज्य सरकार के कर्मचारी का दर्जा दे दिया था।
उन्होंने बताया कि 1967 से 1976 के बीच की अवधि में वेतन रिवाइज न होने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट ने इन कर्मियों को इसके लिए पात्र पाया। हरियाणा सरकार के कर्मियों ने भी दावा किया और कहा कि 1967 से 1976 के बीच उनका वेतन रिवाइज किया जाना चाहिए था जो केंद्र ने इस वजह से नहीं किया कि राज्य सरकारें उन्हें अपना कर्मचारी बनाने जा रही थी। भले ही वे राज्य सरकारों के प्रशासनिक नियंत्रण में थे लेकिन केंद्र के कर्मचारी थे।
हाईकोर्ट ने इस मामले में कर्मचारियों के हक में फैसला सुनाते हुए वेतन रिवाइज करने का 2007 में आदेश दिया था। आदेश का पालन न होने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई। अवमानना याचिका पर स्कूली शिक्षा विभाग ने कहा कि उन्होंने मामला आगे भेज दिया है लेकिन वित्त विभाग के पास यह अटका है।
हाईकोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि यह मामला 15 साल से विचाराधीन है बावजूद इसके इसमें देरी की जा रही है। अगर 28 अगस्त तक आदेश का पालन न किया गया तो स्कूली शिक्षा विभाग व वित्त विभाग के ACS को कोर्ट में मौजूद रह कर इसका जवाब देना होगा।

