सुप्रीम कोर्ट ने उस आईपीएस अफसर को अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया, जिसने अपने खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच को प्रभावित करने के लिए एक ठग को हाईकोर्ट जज के तौर पर पेश किया था। अपने हालिया फैसले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि पूर्व एसपी आदित्य कुमार पर लगे आरोपों की प्रकृति काफी गंभीर है, इसलिए उन्हें राहत नहीं दी जा सकती।
जस्टिस अनिरुद्ध बोस, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि वह सामने आए तथ्यों पर अपनी आंखें नहीं मूंद सकती। मामला न केवल न्यायिक कार्यवाही में पवित्रता बनाए रखने से संबंधित है, बल्कि पूरी व्यवस्था में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिहाज से भी काफी मायने रखता है। हमारा दृढ़ मत है कि आगे निर्देशों की जरूरत है।
साथ ही शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को सीलबंद लिफाफे में यह जानकारी देने को कहा कि हाईकोर्ट ने इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की है।
व्हाट्सएप पर चीफ जस्टिस का फोटो लगा कॉल कराई
आईपीएस आदित्य कुमार के खिलाफ पिछले साल अक्तूबर में मामला दर्ज किया गया था। उन पर आरोप है कि अपने खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही रद्द कराने के लिए सह-आरोपियों संग मिलकर साजिश रची। सह-अभियुक्तों ने उनके संज्ञान में एक व्हाट्सएप अकाउंट बनाया, जिसमें पटना हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस, जो अब सुप्रीम कोर्ट जज हैं, की तस्वीर लगाई गई। फिर जांच में फैसला अपने पक्ष में कराने के लिए इसी व्हाट्सएप नंबर से बिहार के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक को कॉल और मैसेज किए गए।
पटना हाईकोर्ट पहले ही कर चुकी है इन्कार
पटना हाईकोर्ट इसी साल मार्च में पूर्व एसपी को अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर चुकी है। हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देने से इन्कार करते हुए कहा, भ्रष्टाचार हमेशा किसी भी राष्ट्र के विकास और समृद्धि के लिए खतरा रहा है और फिर यह तो एक वर्दीधारी व्यक्ति की तरफ से किया गया है, जिसे ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाना होता है।

