नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में 2 वकील गौरव कुमार बंसल और रीपक कंसल की तरफ से याचिका दाखिल की गई है। कहा गया है कि नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा 12 में आपदा से मरने वाले लोगों के लिए सरकारी मुआवजे का प्रावधान है। पिछले साल केंद्र ने सभी राज्यों को कोरोना से मरने वाले लोगों को 4 लाख रुपए मुआवजा देने का एलान किया था। पर इस साल ऐसा नहीं किया गया। ततसंबंध में जस्टिस अशोक भूषण और एम आर शाह की बेंच ने केंद्र को 24 मई को नोटिस जारी किया था।
इस पर मेहता ने कहा कि केंद्रीय स्तर पर बहुत जल्द नीति तय करने की बात कही और कहा की कोरोना के प्रबंधन से जुड़े दूसरे मामलों में व्यस्तता के चलते इसमें थोड़ा समय लग गया।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस संबंध में जल्द ही निर्णय ले लिया जाएगा। सॉलिसिटर जनरल ने मृत्यु प्रमाणपत्र में मौत की सही वजह दर्ज करने की मांग पर जवाब देने के लिए कोर्ट से 2 हफ्ते का समय मांगा, लेकिन कोर्ट ने ग्रीष्म अवकाश के दौरान ही इस मामले का निपटारा करने के ध्येय से सरकार को जवाब के लिए 10 दिन का समय देते हुए 21 जून को अगली सुनवाई की बात कही।
याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील एस बी उपाध्याय ने डेथ सर्टिफिकेट में मृत्यु की सही वजह दर्ज न करने से मुआवजा पाने में दिक्कत की दलील दी। केंद्र के वकील ने उन्हें आशवस्त किया कि इस पहलू को भी देखा जा रहा है। इसका भी समाधान निकाला जाएगा।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा है कि अस्पताल से मृतकों को सीधा अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा है। न उनका पोस्टमॉर्टम होता है, न डेथ सर्टिफिकेट में लिखा जाता है कि मृत्यु का कारण कोरोना था। ऐसे में अगर मुआवजे की योजना शुरू भी होती है तो लोग उसका लाभ नहीं ले पाएंगे।

