हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हरदोई के एक कथित पत्रकार को आपराधिक मुकदमे में कोई भी राहत देने से इनकार करते हुए कहा है कि असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त पत्रकारों के लाइसेंस रद्द किए जाएं। कोर्ट ने कहा कि सरकार के पास ऐसी मशीनरी है, जो इन गतिविधियों पर रोक लगा सकती है। इसके पूर्व राज्य सरकार की ओर से इसके अपर महाधिवक्ता, शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि पूरे प्रदेश में गिरोह सक्रिय है, जो आम लोगों को ब्लैकमेल कर पैसे ऐंठने जैसी असामाजिक गतिविधियों में शामिल है।

यह आदेश न्यायमूर्ति शमीम अहमद की एकल पीठ ने हरदोई जनपद में एक अखबार के पत्रकार पुनीत मिश्रा, अखबार के डिस्ट्रीब्यूटर प्रदीप वैश्य की याचिका खारिज करते हुए पारित किया। याचिका में दोनों ने वसूली, SC/ST Act और अन्य धाराओं में दाखिल आरोप पत्र, तलबी आदेश को चुनौती दी थी।

याचियों का कहना था कि याची संख्या एक बतौर पत्रकार हरे पेड़ों की कटान के खिलाफ खबरें लिखा करता है, इसी वजह से उन्हें वर्तमान मामले में झूठा फंसाया गया है। कहा गया कि उनके खिलाफ आरोप है कि जब वादी लकड़ी बेचने एक धर्म कांटा पर गया था तो अभियुक्तगण वहां आ गए और उससे वसूली मांग जाति सूचक गालियां दीं।

याचियों की ओर से दलील दी गई कि उक्त घटना की एफआईआर 15 दिन बाद लिखाई गई और देर से एफआईआर लिखाने का कोई कारण नहीं बताया गया। हालांकि न्यायालय ने पाया कि प्रथम दृष्टया याचियों के विरुद्ध संज्ञेय अपराध बन रहा है, लिहाजा आरोप पत्र और तलबी आदेश खारिज नहीं किया जा सकता।

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